आइये कनिका कपूर पर की गई एफआईआर का करते है विश्लेषण

जब पोजोटिव था कोरोना का संक्रमण तो क्यो जाने दिया घर

भारत मे कोरोना पीड़ित लापरवाही बरतने के दो केस आये है सामने वो भी सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से हालांकि सरकार को लापरवाही नजर आते ही सरकार ने इन दोनों के ऊपर एफआईआर भी दर्ज करवा दी है,उनको स्वस्थ करने के लिये जुट भी गए है। लेकिन चल रही लापवाही के दौर में किसकी जिम्मेदारी तय होगी अभी इस बात पर मुहर नही लग पाई है।

लगातार क्यो झूठ बोलती रही कनिका कपूर

गलती होना बड़ी बात नही होता है लेकिन गलती को बार दोहराना ये लापरवाही और बड़ी बात होता है। पहले तो घरेलू हवाई अड्डो पर इस तरीके के कोई जांच ही नही की जाती है। जिससे ये बताया जा सके कि कोरोना वायरस के लक्षण है, दूसरा अगर जांच के समय लक्षण पाए गए थे तो कनिका को उसी समय क्यो नही एडमिट किया गया। जबकि एक चैनल पर उनके पिता ने बताया है उन्होंने 3 से 4 आयोजनों में 300 से 400 लोगो से मिली है ।लेकिन उसी चैनल पर वो कह रही थी। मैं केवल एक फैमली आयोजन में 10 से 30 लोगो से मिली हूं, अगर गलती हो गयी थी तो फिर झूठ का सहारा क्यो ले रही है कनिका।

सरकार के मंत्रियों से लेकर अफसरों की लापरवाही आयी सामने

जिस समय देश मे ये महामारी पैर पसारे हुए है। हमारे देश की सरकार जिम्मेदारी तय करने में लगी हुई है। लेकिन क्या है जिम्मेदार कोई सीख ही नही ले पा रहे है। सरकार की तरफ से जारी एडवाइजरी में साफ कहा गया था।सभी लोग आयोजनो से दूरी बना कर के रहे लेकिन उनके ही जनप्रतिनिधि और अफसरों में लापरवाही होने के कारण आज एक बड़ी आबादी को संकट में डाल दिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी लखनऊ के द्वारा करवाई गयी एफआईआर में साफ-साफ लिखा गया है एयरपोर्ट पर उतरते समय वो संक्रमित थी। उसके बाद में भी इतनी बड़ी लापरवाही होती है तो आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है हम लोग इससे लड़ने के लिए कितने तैयार है।

हालांकि मैं एक जिमेदार नागरिक होने के कारण सभी लोगो से अनुरोध करता हूं, इस महामारी से लड़ने के लिए सभी लोग अपनी अपनी जिम्मेदारी को तय करके निर्वाह करे। क्योकि बचाव से ही हम इस परिस्थिति से लड़ सकते है। हमारे यहां इस वक्त अफवाहों का बाजार गर्म है। इसी लिए हांथो को सेनेटाइज करने के साथ-साथ खबरों को भी सेनेटाइज करे और अफवाहों से बचे।

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